यहाँ कोई आताजाता नही .....यहाँ पर सिर्फ़ कुछ शब्द रहते हैं । यही पर खाते हैं , पीते हैं और सो जाते हैं । चार पाँच दिन में इनका मालिक आता है और कुछ नए शब्दों को फिर छोड़ जाता है ....इनकी फमीली बड़ी हो रही है पर इन्हे कोई नही जानता ......न इनके पास राशन कार्ड है न वोटर आईडी , इनका सेन्सस में रेकॉर्ड भी नही है । ये काले अंधेरे गली में रहते हैं । शायद इन्हे कोई पसंद नही करता । सिवाए इनके मालिक के !
मेरे प्यारे शब्द भाइयों अगर कोई इधर आए तो मुझे बताना , कमेंट दीदी से कहना की वो झटपट लिख लें की कौन आया था , कहा से आया था !!
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3 comments:
यह लिजिए...आप की गली में हम हाजिर हैं:)
oh meri words family aapse milker bahut khussh huiii.....
aate rahiyegaa inse milne
Hum aaye the kuch ummedein le kar
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