हरेक बिजनेस में कुछ ऐसे क्लिआन्ट्स होते हैं जिन्हे हम चिल्लर कहते हैं , इनका बिजनेस महिने में ४०-५० हज़ार का होता है और कुछ बहुत चलेंजिंग काम नही देते ये लोग , कुछ छोटे छोटे काम करवा केर अधिकतर ये लोग आपका टाइम् वेस्ट ही करते हैं !! या तो आप उनपर दिया समय किसी बडे काम पर लगायिये या चिल्लर काम में फसे रह जाईये , बहुत बार उन्हें ना कह देने का मन करता है पर सीधे सीधे मना करना भी अच्छी बात नही रिलेशन खराब करने वाली बात है !!
तो क्या करें जब चिल्लर से बोर हो जाएँ तो ? चिल्लर भुन्वायें उसका कुछ नोट बनायें, आप उन्हें काम सस्ता दे रहे हो क्यूंकि ये लोग हैं जो आपके बिजनेस में शुरू से आपके क्लाइंट हैं !! लेकिन अगर आप इनके काम में ही फसे रह गए तो बडे काम का टाइम् नही मिलेगा- चिल्लर भुन्वायें!! इनके काम के लिए कोट उतना भेजें जितना मार्केट के हिसाब से इन्हें देना चाहिए ....साफ कह दें कि सर इससे कम मैं वारा नही खाता !! अगर क्लाइंट आपको वेलु करता है आपके काम कि क़दर करता है आपको बढ़े हुए कोट के हिसाब से पैसे देगा !! जितना टाइम् आपने उसे दिया वो आपके लिए फ़ायदा बना !! अगर वो नही माने तो चिल्लर को भिखारी के कटोरे में डाल आगे बढ़ जाईये ....बडे काम मे हाथ डालिये ......बड़ा मुनाफा कमायिये
क्यूंकि लाइफ चिल्लर से नही चलती मेरे भाई .....मैंने भी अपने कुछ चिल्लर भिखारी के कटोरे मे डाल दिया है कुछ का नोट बनवाया है !! क्या ख़्याल है आपका मुझे बताओ - सही निर्णय या गलत ?
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